Monday, November 9, 2009

गंगा की धारा क्या बदली बिगड़ गए रिश्ते!

आरा। गंगा की धारा बदलने से भोजपुर जिले के बड़हरा व शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के दो दर्जन गांवों की करीब 15 हजार एकड़ जमीन बिहार-यूपी सीमा विवाद में जा फंसी है। आजिज किसानों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगाई तो उन्होंने जिलाधिकारी डा. सफीना एएन से बलिया के डीएम के साथ बैठकर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है।

एक दशक पूर्व राज्य सरकार के निर्देश पर भूमि विवाद निबटाने को भोजपुर एवं बलिया के जिलाधिकारियों की दो बार बैठक हुई, पर कोई हल नहीं निकल सका। जमीन पर वर्चस्व की जंग में अब तक भोजपुर जिले के तीन दर्जन लोगों की हत्या हो चुकी हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रत्येक वर्ष रबी फसल की बुआई एवं कटनी के वक्त तनाव के मद्देनजर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में सशस्त्र बल तैनात किया जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के दबंग किसान फसल काट लेते है। कृषक नेता भाई ब्रह्मेश्वर, शालीग्राम दुबे, रामईश्वर सिंह बताते है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय से भी भोजपुर जनपद के किसानों की जीत हुई, पर उत्तर प्रदेश सरकार ने फैसला नहीं माना। बता दें कि सन् 1882 में गंगा की धारा में परिवर्तन के बाद कटाव में भोजपुर जनपद के दर्जनभर गांवों की 45 हजार आबादी तीन बार विस्थापित हो चुकी है। सीमा विवाद गहराते देख केन्द्र सरकार ने 1970-71 में त्रिवेदी आयोग का गठन कर सीमांकन का आदेश दिया था। आयोग ने गंगा की धारा को मानकर सीमांकन किया परंतु विवाद खत्म नहीं हुआ। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के भोजपुर जनपद की जमीन यूपी में चली गई तो वहां की सरकार राजस्व लेगी, किन्तु स्वामित्व यहां के कृषकों का होगा। इसी तरह की शर्त वहां के कृषकों के लिए भी रखी गयी। कृषकों के अनुसार बड़हरा विधानसभा क्षेत्र के महुली घाट, मौजमपुर, ख्वासपुर, सलेमपुर, पीपरपांती, त्रिभुवानी, सोहरा, सलेमपुर, सिन्हा, बलुआ, केवटिया, पदमिनिया, मौजमपुर, हेतमपुर, केवटिया, पंडितपुर समेत कई गांवों की खेती योग्य भूमि सीमा विवाद में फंसी है। इसी तरह से शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के नैनीजोर, सोनवर्षा, कारनामेपुर समेत आधा दर्जन गांवों की जमीन पर विवाद है।

बड़हरा के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहते हैं कि बिहार-यूपी सीमा विवाद का हल निकालने के लिए राष्ट्रीय सहमति जरूरी है। केन्द्रीय स्तर पर वार्ता का आयोजन हो और उसमें बिहार एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा कृषक प्रतिनिधि भाग लेंगे तभी समस्या का हल संभव है। जबकि शाहपुर की विधायक मुनी देवी कहती हैं कि बिहार-यूपी सीमा विवाद का अब तक हल नहीं होने के पीछे केन्द्र सरकार जिम्मेदार है।
दैनिक जागरण

Sunday, November 8, 2009

नोट्रेडेम एकेडमी गोल्डन जुबली अन्तर विद्यालय एथेलेटिक्स मीट का शुभारंभ

पटना : नोट्रेडेम एकेडमी पेरेन्टस-टीचर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित गोल्डन जुबली अन्तर विद्यालय एथेलेटिक्स मीट का शुभारंभ नोट्रेडेम एकेडमी, पाटलिपुत्रा के मैदान में मुख्य अतिथि संत जेवियर्स स्कूल, पटना के प्रिंसिपल फादर जार्ज द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा आकर्षक मार्च पास्ट निकाला गया। एथेलेटिक्स मीट का प्रारंभ मुख्य अतिथि के साथ विशिष्ट अतिथि बिहार क्रिकेट एकेडमी के निदेशक अमीकर दयाल व विद्यालय की प्राचार्या सिस्टर टेसी, सिस्टर सोनिया, सिस्टर नीता द्वारा गुब्बारा उड़ाकर किया गया। आज संपन्न हुए स्पर्धाओं में कुल 33 पदक प्राप्त कर नोट्रेडम की बालिकाओं ने शानदार शुरूआत की। वहीं संत माइकल, हार्टमैन, जूली स्कूल एवं इंटरनेशनल स्कूल के भी प्रदर्शन सराहनीय रहे।

Tuesday, November 3, 2009

Relief cheques from Bihar govt bounce

KHAGARIA: There could be nothing more embarrassing to the Bihar government: families of at least four of the victims who met watery grave following a boat capsize during Durga Puja festivities have not got any ex gratia payment because the government cheques have bounced.

The tragic mishap in the Kareh river in Khagaria's Alauli block on September 29 had claimed 61 lives. While these many bodies were fished out, villagers claim at least 13 others, who were also aboard, are still missing.

As per the government announcement, cheques for Rs 1.5 lakh each victim were distributed among the bereaved families by Alauli officials.

While most of them had the cheques credited to their bank accounts, four of them have returned homes empty-handed as the local branch of Bank of Baroda refused to accept the cheques.

"All these cheques are of a government account which has no balance," a BoB official told TOI, preferring anonymity.

"We are being harassed for no fault of ours," Jagdish Singh of Fultora village said and added cheques of Dilip Mukhiya, Vakil Sah and Raghubir Sah of his village were also not accepted by the bank.

Khagaria DM Abhay Kumar Singh could not be contacted as he was away on leave and calls to his cellphone went unresponded on Monday evening.

Monday, November 2, 2009

सिसवन में हर सुबह बसता है एक बेगूसराय

सिसवन (सिवान): विज्ञान की तेज गति ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित टोटकों के आगे कभी-कभी धीमी लगती है। सिवान के सिसवन प्रखंड के घुरघाट गांव में ऐसा हीं दिखता है। यहां के लोग सुबह में अपने गांव का नाम नहीं बताते। इसके पीछे यह मान्यता है कि नाम बताने से उस दिन के लिए उनका भाग्य बिगड़ जाएगा। जरूरत पड़ने पर अगर सुबह में गांव का नाम बताना पड़े, तो ग्रामीण 'घुरघाट' के बदले 'बेगूसराय' कह काम चलाते हैं।

गांव में मान्यता है कि अगर प्रात:काल में ग्रामीण इसका नाम लें तो उनका बना काम भी बिगड़ जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार इससे व्यवसाय में घाटा, दुर्घटना, मृत्यु या किसी अन्य परेशानी आदि से सामना होता है या इसके समाचार मिलते हैं। गांव के चंद्रिका लाल शर्मा के अनुसार इस कारण वे व्यवसाय में घाटा भोग चुके हैं। ग्रामीण संतोष शर्मा की मानें तो एक सुबह इस गांव का नाम लेने के कारण वे एक झूठे मुकदमें में फंस गए थे। गांववालों ने कहा कि इस कारण घुरघाट को सुबह में बेगूसराय के नाम से पुकार कर काम चलाया जाता है। आसपास के सभी लोग इस तथ्य को जानते हैं। लेकिन जब कोई अजनबी सुबह में यहां के रास्ते से गुजरते हुए गांव का नाम पूछता है, तब प्रत्युत्तर में बेगूसराय सुन आश्चर्यचकित हो जाता है। उसे लगता है कि सामने वाला व्यक्ति मजाक कर रहा है। आगे बढ़ने पर दूसरा ग्रामीण भी उसी तरह का उत्तर देता है। तब भ्रमित व्यक्ति आगे बढ़ दूसरे गांव जाकर ही इस 'घुरघाट' व 'बेगूसराय' का माजरा समझ पाता है। यह मान्यता न सिर्फ घुरघाट बल्कि आस-पास के गांवों में भी प्रचलित है।

इस टोटके का प्रचलन कब से है, यह गांव के बड़े-बुजुर्ग भी नहीं बता सके। ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा सौ-दो सौ साल पुरानी जरूर होगी। उन्होंने कहा कि घुरघाट नाम में कोई अशुभ नहीं, क्योंकि दिन में इसका उच्चारण करने से किसी को गुरेज नहीं। हा, गांव का नाम सुबह में नहीं लेने की एक परिपाटी चल पड़ी है।

गांव के नाम से जुड़ी इस बदनामी से यहां का युवा वर्ग आहत है। ग्रामीण उमेश तिवारी, संतोश शर्मा व मुखिया पुत्र रिंकू उपाध्याय मानते हैं कि आज के वैज्ञानिक युग में किसी नाम को जुबान पर लाने से किसी का भाग्य नहीं बनता-बिगड़ता। लेकिन वे परंपरा व अंधविश्वास को तोड़ने का साहस नहीं कर पाते हैं। स्थानीय मुखिया कमला देवी भी मानती हैं कि यह अंधविश्वास है।

बहरहाल, अंधविश्वास के जाल में फंसे सिवान के सिसवन प्रखंड में हर सुबह एक बेगूसराय बसता है।

Sunday, November 1, 2009

विश्‍वविख्‍यात सोनपुर मेला आरंभ

सोनपुर (सारण), बिहार । बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने रविवार (01 नवंबर) को विश्‍वविख्‍यात सोनपुर मेले का उदघाटन किया। समारोह की अध्यक्षता मेला प्राधिकार के अध्यक्ष सह राजस्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव ने की।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मेले में पंजाब व हरियाणा से पशुओं को लाने के लिए हमारे अधिकारी वहां कैम्प लगाये हैं। सोनपुर मेले को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राज्‍य सरकार हर संभव प्रयास करेगी। मेला प्राधिकार के अध्यक्ष सह राजस्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि मेला प्राधिकार को अधिकार संपन्न बनाया जाएगा। सोनपुर घाट के विकास के लिए चार करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर और राशि दी जाएगी।
इस मौके पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री अश्रि्वनी कुमार चौबे, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री रामनाथ ठाकुर, लघु संसाधन मंत्री दिनेश प्रसाद, सांसद रामसुंदर दास, विधायक जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विनय कुमार सिंह, विधायक छोटेलाल राय, आयुक्त एस. शिव कुमार, जिलाधिकारी लोकेश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक डा. केके सिंह, अपर समाहर्ता मदनजी पांडेय, स्थापना उप समाहर्ता वीरेन्द्र कुमार मिश्र, जनसंपर्क उप निदेशक मुस्ताक अहमद नूरी, डीपीआरओ रवीन्द्र कुमार दिवाकर सहित अन्य मंत्री, विधायक, विधान पार्षद व अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अशोक प्रियदर्शी ने किया।

ANOTHER EXTRAORDINARY ACHIEVEMENT OF KS ANUPAM (IPS)


KS Anupam (IPS) a President’s Police Medal (Gallantry) award winner has got another achievement in Gopalganj Distt. of Bihar. The recovery of Aayush Ranjan on 01.11.2009 is the result of her honest efforts. Aayush, a student of class 3 was kidnapped on 29th. of Oct.,2009. The Aayush Kidnapping case reminded me of anotuer case, which she solved at Saharsa ( Bihar). That was Aakashdeep Kidnapping case. That boy was also recovered. The entire gang was crushed. At that time, I was posted as Bureau Chief of Dainik Jagran at Saharsa.

K.S. Anupam is an engineering graduate from Gitam College, Rishikonda. Her husband Amritraj is now posted as an SP at Bettiah Distt. of BIhar. Anupam and Amritraj are the first IPS couple to win the Gallantry Award. While the latter apparently was honoured in 2005, Anupam is the second lady officer after Dr Geeta Mehta to be awarded with the medal for showing exemplary courage and achieving results in her field. Anupam believes that women are talented and with encouragement from the family, they can set goals and easily achieve them.

Anupam thinks that People should have faith in the police and the system. She thinks, the recovery of Aayush will establish faith of the local people on Gopalganj Police.

गंगू बाई के हंसगुल्लों से लोटपोट हुए सभी

पटना माइक थामे लाल काले परिधान में 'लल्ली' जैसे ही मंच पर आयी, मानो सभी समझ गये कि अब वे लोटपोट होने वाले हैं। तालियों की गड़गड़ाहट और 'लल्ली' का खिलखिलाता चेहरा। उसने हलो पटना तो कहा लेकिन जब पटनावासियों से 'कैसे हैं' पूछने को कहा गया तो उसने खुद ही जवाब दे डाला- ठीक हूं अच्छी हूं! उसकी इस मासूमियत पर सभी हंस पड़े। अपनी इस नन्ही-सी हरकत से उसने जता दिया कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाली गंगू बाई आज भी उतनी ही नादान है जितना कोई अन्य बच्चा।

मंच पर उसका आना था कि शुरू हो गये एक के बाद एक हंसगुल्ले। एक तो मनमोहक व्यक्तित्व, इस पर उसकी प्यारी-प्यारी बातें। सबसे पहले 'लल्ली' उर्फ सलोनी ने टारगेट किया अपने ही अभिभावकों को। पापा को कामचोर बताते हुए उसने कहा कि मम्मी का काम चुरा-चुरा के वे करते रहते हैं। अभी लोगों की हंसी रुकी भी नहीं थी कि उसने बताया कि किस तरह उनका 'लांग ड्राइव' बहुत लम्बा हो गया था। वजह थी ब्रेक फेल! सबसे खास बात थी बार-बार वह बड़े अनोखे अंदाज में ताली बजाने को कह रही थी। 'जोर से बजाओ ताली' कहने के क्रम में वह झुक भी रही थी। यह अदा भी अलग थी। भारतीय नृत्य कला मंदिर के मुक्ताकाश मंच का नजारा शनिवार की देर शाम वाकई अलग था। मौके पर सलोनी ने कविताएं भी सुनायीं। सलोनी ने गंगू बाई को बुलाने की बात की और इस इंतजार में उसने केवल लल्ली का रूप धरा, बल्कि दर्शकों को कई गेस करने को भी कहा। अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, सोनिया गांधी, लता मंगेशकर जैसी हस्तियों की मिमिकरी कर उसने सभी से व्यक्तित्व को पहचानने की बात की। आन मासूमी द्वारा आयोजित 'सा रे गा मा पटना 2009' के तहत मशहूर गायक राजा हसन भी यहां मौजूद थे। आसमानी कुर्ते सफेद पाजामे में जलवे बिखेरते हुए राजा ने शुरुआत की 'टूटा टूटा एक परिंदा ऐसे टूटा कि फिर जुड़ ना पाया.. अल्लाह के बंदे हंस दे..' से। सभी इनके साथ गुनगुनाते हुए झूम रहे थे। ठीक बाद बारी आयी 'पिया रे पिया रे..' की। दूसरी बार पटना आये राजा अपना जादू आज भी चलाये जा रहे थे। इस क्रम में तेरे नाम से जी लूं.. पिया हाजी अली.. जय हो.. जैसे गीत उन्होंने गाये। इतना ही नहीं, मौके पर एकता वर्मा जैसे कलाकारों ने नृत्य भी किया। पूर्व विधायक श्याम रजक ने भी मौजूदगी दर्ज की। लखी राय की आवाज ने भी तब मोहा जब उन्होंने 'तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बंधन अनजाना..' गाया। राजा हसन ने आज अपना जादू चलाया तो गंगू बाई भी आगे रहीं। विशेष तौर पर बच्चों की भीड़ आज खूब रही। इससे पूर्व आज सलोनी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से भी मुलाकात की। राजद सुप्रीमो ने केवल 'गंगू बाई' को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दीं, बल्कि छठ का प्रसाद भी खिलाया। खूब प्यार आशीर्वाद लेकर गंगू बाई वहां से आयीं।
Dainik Jagran, Patna